आँगन में बनाया गया है सामुदायिक शौचालय किसी को जाने कि अनुमति नही- ग्रामीण  

लहसुन प्याज का गोदाम बना है सामुदायिक शौचालय - ग्रामीण 

नियम को ताक पर रखकर बनाया गया है सामुदायिक शौचालय - ग्रामीण

शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही- ग्रामीण

गणपत कुमार

भरगामा। प्रखंड के शंकरपुर पंचायत में लाखों कि लागत से बना समुदायिक शौचालय गोदाम में तब्दील हो गया है। यहाँ सामुदायिक शौचालय लहसुन- प्याज के गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। 

“खुले में शौचमुक्त” के लिए सरकार कि महत्वकांक्षी योजना ‘लोहिया स्वच्छ मिशन’ के तहत गांवो में लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालय में भरी अनियमितता बरतते हुए नियम को तक पर राख कर बनाया गया है। जिससे सरकार कि यह मंशा कि लोगों को शौच के लिए इधरउधर ना भटकना पड़े पर पानी नही लहसुन प्याज फिर गया है। 

शंकरपुर पंचायत  में स्वच्छ भारत मिशन अभियान की जमकर धज्जियाँ उड़ाते हुए, खुले में शौचमुक्त के उद्देश्य को पलीता लगाते हुए सामुदायिक शौचालयों को निजी व्यक्ति के आँगन में बनाया गया है जहाँ किसी भी ग्रामीणों को जाने कि अनुमति नहीं है। जिससे लोगों को सामुदायिक शौचालय का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड़ता हैं।

ताजा मामला शंकरपुर पंचायत के वार्ड नंबर 1 से जुड़ा हुआ है, जहाँ वार्ड 1 में निजी आँगन बने सामुदायिक शौचालय का गोदाम के रूप में इस्तेमाल होता है। कहने को तो इस शौचालय का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में लगभग 3वर्ष पूर्व कर दिया गया था, लेकिन लोकार्पण के बाद भी सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल ग्रामीण नही कर पारहे हैं। 


क्या है योजना?

केंद्र सरकार की अति महत्त्वाकांक्षी योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे ऐसे लोग जिनके पास एकल शौचालय नहीं है उनके लिए ‘खुले में शौचमुक्त’ के उद्देश्य से सामुदायिक शौचालय की सौगात दी गई है। जिनमें महिलाओं व पुरूषों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं। साथ ही इनको प्रयोग करने में किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा।

क्या कहते है ग्रामीण 

शंकरपुर पंचायत के निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सामुदायिक शौचालय में लहसुन प्याज इत्यादि भरे होने के कारण उन्हें खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड़ता है। वहीं कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें रात में या बारिश के समय बाहर जाने में काफी दिक्कतों व शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इसी के साथ शंकरपुर पंचायत में दैनिक सफाई व्यवस्था की हालत भी काफी दयनीय है।